Thursday, January 18, 2018

209>-|| মানুষের নিজের কি আছে-।।

 209>মানুষের নিজের কি আছে-।। 11/09/2017==
মানুষের নিজের কি আছে ?
জন্ম---দিয়েছে অন্য জনে,
নাম---দিয়েছে অন্য জনে,
শিক্ষা---দিয়েছে অন্য জনে,
রোজগার--দিয়েছে অন্য জনে,
এবং শ্মশানে--নিয়ে গেছে অন্য জনে।
তাহলে মানুষের এতো কেন অহংকার??
||--©➽ -ANRC----11/09/2017::::--||
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मनुष्य के आपना केया हैं??
जन्म लिया आपनेसे निहि।
नाम दिया दूसरे कोई,
शिक्षा ओभी तो दिया शिक्षक ने,
रोजगार दूसरे के दफ्तर में,
जीबन के अंतिम जात्रामें जाना है सबको,
ओभित दूसरोंके कंधे चरके जानाहैं श्मशान में।
तभी हम आहंकार करते हैं।
चाहत ख़तम नेही होते हैं।
लोभ,लालच,मोह,काम,क्रोध से
भर रखते हैं आपना मन को।
||--©➽ --ANRC----11/09/2017::::--||
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