283>||- ऋतु राज बसंत -||
<------©--आद्यनाथ--->
आरहा हैं बसंत ऋतु राज,
आरहा हैं हरियाली ऋतु राज।
आरहा हैं फुलोकी ऋतु राज,
आरहा हैं प्यारकी ऋतु राज।
सुचोना हैं बसंत ऋतु आनेकि,
खेत खोरियान हरियाली छायेगी।
किसानों के मन में खुशियाँ छायेगी,
बन बिथी में हरियाली छायेगी।
सुचोना हैं बसंत ऋतु आनेकि,
महुआ बन बस जाऊंगी
मेहंदी रंग रचाऊंगी
दरिया में जल केली खेलूंगी
सुचोना हैं बसंत ऋतु आनेकि,
खामोशी का इयाद नहीं करुंगी।
फूलों की डालियां सजाऊंगी
घर घर मी खुशियां लाऊंगी।
सुचोना हैं बसंत ऋतु आनेकि,
आपना सुहाग को बुलालूंगी।
फुलोसे उनका स्वागत कोरूंगी,
पलाश फूलोसे सजुंगी।
सुचोना हैं बसंत ऋतु आनेकि,
गजरा बनाकर हैं इंतेज़ार उनकी।
गुलाब,पलाश, शिमुलकी
रंगोली खेलेंगी हम गुलालकी।
सुचोना हैं बसंत ऋतु आनेकि,
रंगोली रंग लाईगी होलिकी।
प्यार की रिस्तो में इंतेज़ार
बसंत ऋतु आनेकि इंतेज़ार।
【--anrc--16/02/2019--】
【=रात्रि 02:20:12=】 【=बेलघरिया=कोलकाता-56=】
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<------©--आद्यनाथ--->
आरहा हैं बसंत ऋतु राज,
आरहा हैं हरियाली ऋतु राज।
आरहा हैं फुलोकी ऋतु राज,
आरहा हैं प्यारकी ऋतु राज।
सुचोना हैं बसंत ऋतु आनेकि,
खेत खोरियान हरियाली छायेगी।
किसानों के मन में खुशियाँ छायेगी,
बन बिथी में हरियाली छायेगी।
सुचोना हैं बसंत ऋतु आनेकि,
महुआ बन बस जाऊंगी
मेहंदी रंग रचाऊंगी
दरिया में जल केली खेलूंगी
सुचोना हैं बसंत ऋतु आनेकि,
खामोशी का इयाद नहीं करुंगी।
फूलों की डालियां सजाऊंगी
घर घर मी खुशियां लाऊंगी।
सुचोना हैं बसंत ऋतु आनेकि,
आपना सुहाग को बुलालूंगी।
फुलोसे उनका स्वागत कोरूंगी,
पलाश फूलोसे सजुंगी।
सुचोना हैं बसंत ऋतु आनेकि,
गजरा बनाकर हैं इंतेज़ार उनकी।
गुलाब,पलाश, शिमुलकी
रंगोली खेलेंगी हम गुलालकी।
सुचोना हैं बसंत ऋतु आनेकि,
रंगोली रंग लाईगी होलिकी।
प्यार की रिस्तो में इंतेज़ार
बसंत ऋतु आनेकि इंतेज़ार।
【--anrc--16/02/2019--】
【=रात्रि 02:20:12=】 【=बेलघरिया=कोलकाता-56=】
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